बालाघाट के नक्सल प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग ने मोर्चा संभाल लिया है। कुपोषण और बीमारियों से बचाव के लिए बड़े स्तर पर मेडिकल कैंप और डोर-टू-डोर सर्वे किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के सुदूर नक्सल प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा रेस्क्यू और मैनेजमेंट अभियान छेड़ दिया है। कुपोषण और बीमारियों की चुनौती के बीच विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। जिन इलाकों में कभी सुरक्षा कारणों से 40 सालों तक मेडिकल टीमें पहुंचने से कतराती थीं, वहां आज 20 सर्वे टीमें, 4 मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU), 10 चिकित्सा अधिकारी और 4 एंबुलेंस दिन-रात तैनात कर दी गई हैं।
मेडिकल मैनेजमेंट के तहत टीमों ने 10 गांवों के 980 घरों में डोर-टू-डोर स्वास्थ्य सर्वे का कठिन काम पूरा किया है। इस दौरान 630 ऐसे मरीजों की पहचान की गई, जिन्हें इलाज की सख्त जरूरत थी। इनमें से 461 मरीजों का घर पर ही सफल उपचार कर उन्हें स्वस्थ कर दिया गया है। वहीं, जिन 125 मरीजों की हालत गंभीर थी, उन्हें तुरंत एंबुलेंस के जरिए रेस्क्यू कर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बच्चों में फैल रही बीमारियों और कुपोषण को रोकने के लिए विशेष केयर शुरू की गई है। पिछले एक महीने के भीतर 169 गंभीर रूप से बीमार बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 125 बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। इस पूरे मेडिकल रेस्क्यू का एक अहम हिस्सा यह है कि हर ग्रामीण का मेडिकल रिकॉर्ड बनाया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में इलाके की बीमारियों का पैटर्न समझा जा सके।
बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने और पोषण के लिए ग्राउंड पर भारी मात्रा में दवाइयां बांटी जा रही हैं। हेल्थ बुलेटिन के आंकड़ों के मुताबिक, 597 बच्चों को आयरन सिरप और 521 बच्चों को अल्बेंडाजोल (कृमि नाशक) की गोली खिलाई गई है। इसके अलावा बच्चों को विटामिन-ए, डफर और जिंक का डोज दिया गया है, जबकि 63 बच्चों को मीजल्स (खसरा) का टीका लगाया गया है।
मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने पहले चरण में 100 से ज्यादा गांवों के लिए 200 करोड़ रुपये से अधिक का बजट जारी किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के दौरे और पीएम मोदी व अमित शाह की नीतियों के कारण आज मेडिकल टीमों का मनोबल बढ़ा है। जहां पहले नक्सली कैंप होते थे, वहां आज जनसुविधा केंद्र चल रहे हैं। 40 साल के अंधेरे के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की यह रोशनी एक बहुत बड़ी मेडिकल कामयाबी है।

