20 जून से जंतर-मंतर पर भड़के आंदोलन की कहानी आखिरकार सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर शांत हो गई है। अदालत ने छात्रों की सभी एफआईआर रद्द कर दी हैं और नीट 2026 के पीड़ितों को 3 महीने में मुआवजा देने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इसी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन से जुड़ी सभी एफआईआर को रद्द कर इस कहानी को एक सुखद अंत दिया है। अदालत ने इस ऐतिहासिक फैसले के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 में दी गई शक्तियों का इस्तेमाल किया। हालांकि, इस कहानी का एक डार्क साइड यह भी है कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डेटाबेस के मुताबिक, दिल्ली में क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा।
कहानी के अगले पन्ने पर नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों का दर्द है, जिन पर दर्ज 13 एफआईआर रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई की। यह अहम मांग भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने रखी थी। इसी दौरान पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान मौजूद रहे 2,873 लोगों की भूमिका की जांच के लिए नई एफआईआर दर्ज करने की परमिशन भी अदालत से मांगी।
हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए इस विरोध प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों में से कुछ के खिलाफ एफआईआर पर आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है। अदालत ने साफ किया कि जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर बढ़ाने की अनुमति दी गई है उनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस ने भी आश्वस्त किया कि आम तौर पर नई एफआईआर दर्ज कर किसी बेगुनाह को नहीं फंसाया जाएगा।
पुलिस ने कोर्ट से यह भी कहा कि उसका यह फैसला सिर्फ इसी मामले की परिस्थितियों तक सीमित रहे और भविष्य के मुकदमों की कहानियों में इसे मिसाल न माना जाए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि केंद्र (दिल्ली पुलिस) के अलावा बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने भी छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर दिए हैं। सरकारों ने अदालत को यह पक्का आश्वासन भी दिया है कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन से संबंधित घटनाओं को लेकर भविष्य में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
सुनवाई से पहले इस कहानी में एक बड़ा ठहराव तब आया जब कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर के मार्च को वापस लेने का फैसला किया। पार्टी के प्रवक्ता सौरव ने बताया कि केंद्र ने उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दे दिया है।
दास ने इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के वकीलों और अदालत की ओर से किए गए प्रयासों के लिए उन्हें दिल से धन्यवाद भी दिया।
सीजेआई (CJI) ने कहानी के सबसे भावुक हिस्से पर कहा कि जहां तक नीट परीक्षा, 2026 के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के मुआवजे का सवाल है, हमें बताया गया है कि इसके बारे में नीति 3 महीने में बना ली जाएगी। उन्होंने कहा कि इस नीति को 3 महीने में पूरा कर हर हाल में मुआवजा दिया जाए।
सीजेपी के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यदि दोनों पक्ष सद्भावना के साथ काम करें तो सभी मुद्दों को एक-एक कर सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसे खुले मन से चर्चा के जरिए हल न किया जा सके। सॉलिसिटर जनरल ने भी कहा कि दोनों पक्षों ने रचनात्मक तरीके से काम किया और एक-दूसरे को दुश्मन की तरह नहीं देखा।
इस कहानी की शुरुआत के पन्नों में दर्ज है कि 20 जुलाई को सीजेपी के नेतृत्व में दिल्ली में हुए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच भारी झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ रही इस भारी भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।
इसके बाद छात्रों का यह आंदोलन आग की तरह कई शहरों तक फैल गया। उनकी मुख्य मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था।
यह पूरा आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर की सड़क से शुरू हुआ था। आखिरकार, प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से सीजेपी की दूसरी मांगें मानने के बाद 25 जुलाई को यह आंदोलन खत्म कर दिया गया था।

