मध्य प्रदेश की परिवहन व्यवस्था में क्या बड़े बदलाव होने वाले हैं? इंदौर में 11-12 सितंबर को होने जा रही विजन समिट का हमने गहरा विश्लेषण किया है, ताकि पीपीपी और आईटीएमएस का सच सामने आ सके।

अगर मध्य प्रदेश की वर्तमान परिवहन व्यवस्था का विश्लेषण किया जाए, तो उसमें पीपीपी मॉडल और आधुनिकीकरण की भारी कमी नजर आती है। इसी गैप को भरने के लिए 11 और 12 सितंबर 2026 को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 'यात्री परिवहन विजन समिट 2026' बुलाई गई है। हमारी पड़ताल के मुताबिक, इस समिट का पूरा फोकस 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के तहत एक इकोसिस्टम तैयार करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 सितंबर को इसका उद्घाटन करेंगे, जबकि परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी इस नीतिगत बदलाव की निगरानी करेंगे। इसे MPYPIL और ईलेट्स टेक्नोमीडिया ने रणनीतिक रूप से डिजाइन किया है।
इस समिट के एजेंडे की गहराई में जाएं तो मुख्यमंत्री द्वारा जिस इंडस्ट्री-एक्सपो का उद्घाटन किया जाएगा, वह असल में निजी निवेशकों को लुभाने का एक मास्टरप्लान है। इसके साथ ही MPYPIL के नए लोगो का अनावरण, स्मारिका व विशेष पुस्तिका का विमोचन सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि सरकार की नई ब्रांडिंग का हिस्सा है। मोबिलिटी स्टार्ट-अप्स के लिए लॉन्च होने वाला हैकाथॉन इस बात का सबूत है कि सरकार अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर नए तकनीकी दिमागों का इस्तेमाल करना चाहती है।
डेटा बताता है कि जब तक निजी बस ऑपरेटर और राज्य परिवहन उपक्रम एक पेज पर नहीं होंगे, व्यवस्था नहीं सुधरेगी। इसलिए इस समिट में देश भर के ऑपरेटरों, नीति निर्माताओं और आईटी कंपनियों को आमंत्रित किया गया है। 8 विशेष सत्रों में पीपीपी मॉडल, ग्रीन ऊर्जा और पारदर्शी प्रणालियों को लागू करने का जो ब्लूप्रिंट रखा जाएगा, वह भविष्य में मध्य प्रदेश के ट्रांसपोर्ट सेक्टर का संविधान बन सकता है।
इस इवेंट में टाटा मोटर्स, ईकेए मोबिलिटी, ग्रीनसेल मोबिलिटी, वोल्वो-आयशर प्राइवेट लिमिटेड, स्विच मोबिलिटी (हिंदुजा ग्रुप), एयरो ईगल ऑटोमोबाइल, यश टेक्नोलॉजीज, रैपिडो, चलो मोबिलिटी, एमनेक्स इन्फोटेक्नोलॉजीज, एसबीआई, थिंक गैस और IOCL जैसी दिग्गज कंपनियों का आना यह दर्शाता है कि वे यहां बड़ा बाजार देख रही हैं। वहीं, KPMG, WRI इंडिया, BITS पिलानी, CEPT अहमदाबाद और DIMTS जैसे थिंक टैंक इन कंपनियों और सरकार के बीच एक विश्लेषणात्मक पुल का काम करेंगे।
समिट के 8 सत्रों का अगर डिकोड करें तो: पहला और दूसरा सत्र सीधे तौर पर विजन 2030 के तहत ITMS और बस टर्मिनलों के लिए पीपीपी निवेश जुटाने पर है। तीसरा सत्र बसों की वित्तीय निर्भरता कम कर उन्हें विज्ञापन व लॉजिस्टिक्स (गैर-किराया राजस्व) से मुनाफे में लाने का है। चौथा सत्र एमएसएमई को जोड़ने का है, जिसमें पीएम मुद्रा, पीएमईजीपी, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, पीएम कौशल विकास, पीएम ई-ड्राइव, पीएम ई-बस सेवा और पीएम गति शक्ति योजना शामिल हैं। पांचवां सत्र सीसीटीवी और आपातकालीन प्रतिक्रिया के जरिए पैसेंजर सिक्योरिटी का है। छठवां सत्र एआई (AI) और डेटा के जरिए रूट शेड्यूलिंग का तकनीकी पहलू है। सातवां सत्र हाइड्रोजन व इलेक्ट्रिक बसों (ADAS) के इको-सिस्टम पर है, और आठवां सत्र नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड व MaaS के माध्यम से एकीकृत टिकटिंग (एक राज्य-एक यात्रा) का वित्तीय ढांचा तैयार करने के लिए है।

