भोपाल के धरना स्थल पर अपनी मांगों को लेकर बैठे शिक्षक अभ्यर्थियों के संघर्ष की कहानी अब एक भावुक और कठिन मोड़ पर पहुंच गई है। सरकार ने पद बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है, जबकि तीन युवा भूख हड़ताल पर हैं।

मध्य प्रदेश के उन हजारों शिक्षक जो महीनों की तैयारी और परीक्षा के बाद अब राजधानी भोपाल की सड़कों पर अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पदों की संख्या बढ़ाने की उम्मीद लेकर कई दिनों से धरना दे रहे इन युवाओं को उस वक्त गहरा आघात लगा, जब शिक्षा विभाग ने उनकी मांगों को सिरे से खारिज कर दिया। विभाग ने एक बयान जारी करते हुए साफ कह दिया कि जब किसी परीक्षा का परिणाम आ जाता है, तो उसके बाद पदों की संख्या में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। खाली बचे पदों को अगली भर्ती में निकाला जा सकता है, मगर इस पुरानी भर्ती में जोड़ना मुमकिन नहीं है।
कहानी का पेंच तब और उलझ गया जब शिक्षा विभाग ने खाली पदों की हकीकत बयां की। विभाग ने स्पष्ट किया कि जो पद खाली दिखाई दे रहे हैं, वे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के योग्य अभ्यर्थी न मिलने की वजह से बैकलॉग में चले गए हैं। कानूनन इन आरक्षित पदों को सामान्य या ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को नहीं दिया जा सकता। विभाग ने अभ्यर्थियों के उस दर्द को भी खारिज कर दिया जिसमें वे कह रहे थे कि भर्ती नहीं की जा रही, और साफ किया कि प्रदर्शन में बैठे लोग चयनित अभ्यर्थी नहीं हैं।
इस पूरे गतिरोध के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह की बात याद आती है, जिन्होंने पहले ही स्थिति साफ करते हुए कहा था कि एक झटके में सभी खाली पदों को भर देना संभव नहीं होता। उन्होंने बताया था कि प्रदेश में 70 हजार अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे हैं, लेकिन उन सभी जगहों को खाली मानकर नियमित भर्ती से नहीं जोड़ा जा सकता। भर्ती की राह में आरक्षण, बैकलॉग और ओबीसी कोटे के कई नियम होते हैं, हालांकि मुख्यमंत्री की कोशिश यही है कि जितने जरूरी पद हैं, उन्हें भरा जाए।
अब इस दास्तान का सबसे दर्दनाक हिस्सा भोपाल की तपती जमीन पर लिखा जा रहा है, जहां कई दिनों से प्रदर्शन चल रहा है और तीन अभ्यर्थी अपनी जान जोखिम में डालकर अनशन पर बैठे हैं। इन युवाओं की आंखें नम हैं और वे कहते हैं कि घरवालों ने ही भविष्य संवारने के लिए आंदोलन का रास्ता दिखाया था। भूख हड़ताल से उनका शरीर टूट रहा है और स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। इसी बीच, विपक्ष के रूप में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार इस कहानी में उतरे और उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि इन युवाओं की मांगें पूरी तरह जायज हैं और सरकार को पत्थर दिल छोड़कर तुरंत इनकी सुननी चाहिए।

